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  Happiness 24x7 Happiness starts with us and is a state of mind, rather than physical condition.  if we feel and want to be happy, we will be! , but still, 99% of us will never know how to achieve happiness in its easiest form. How to be happy? is one of the most asked questions and everybody wants to achieve happiness. We spent our entire life in search of Happiness and yet we couldn’t.  we need to have a purpose in life but purpose with happiness. Once you get the status of 24x7  Happiness, life will be easy for us. Living simple and uncomplicated life is the ultimate goal. Happiness with simplicity makes your life different and better from others. You. Let's understand first the meaning of happiness, Happiness (maybe your work, your deeds, your behaviour) is something that brings joy continuously without harming anyone.  I Narrate the subject with a little story, There was a man who used to work day and night to earn money so that he could give happiness to ...

जिंदगी चलती रहे - यौवन बढ़ता चले

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  जिंदगी चलती रहे - यौवन बढ़ता चले  कवि की पंक्ति से प्रारंभ करते हैं  " निर्झर में गति है,जीवन है ,वह आगे बढ़ता जाता है ! लहरें उठती है , गिरती है ,तब यौवन बढ़ता आगे ,बढ़ता ही  जाता है। चलना है, केवल चलना है ! जीवन चलता ही रहता है ! रुक जाना है मर जाना ही, निर्झर यह झड़ कर कहता है !  जीवन की उपमा नदी के कलकल प्रवाह से , समुंद्र की अथल गहराई  से , वृक्ष के काल क्रम से और पानी के अनवरत झरने से की गई है।  इन सबमे गतिशीलता और परिवर्तन के साथ सांमजस्य की क्षमता इनकी उपयोगिता बनाये रखती है , उपमित जीवन भी निरंतरता के साथ गतिशील रहे तभी जिंदगी की प्रांसगिकता  है, तभी तो जिंदगी चलती रहे  यौवन बढ़ता चले । यौवन का सम्बन्ध मात्र अवस्था से कतई नहीं है , वरन आपके स्वास्थय ( शारीरिक और मानसिक) , मन की सोच , सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश एवं शिक्षा से भी गहरा नाता है।  Hit युवा Fit युवा वही है जो जिंदगी में नित नवीन चुनौतियों  का सामना करते हुआ विकास करे।  जीवन में सभी के उतार - चढ़ाव , कृष्ण -शुक्ल पक्ष , दुःख - सुख आते है उनका सकारात्मक ढंग ...
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  Ten travel destinations in India.  India has a rich heritage and ancient civilizations. I am writing about Ten travel destinations which I have travelled & enjoyed.  1. Lothal - considered the world's oldest port town, part of 5000 years of Harappan civilization. Excavated Dockyard, town planning, grains, storage & brickwork mesmerize visitors. An archaeological survey of India constructed a museum at the site. The site is 80 km & 135 km away from Ahmedabad & Vadodara (Gujarat). Nearest Airport is Ahmedabad. 2. Ranakpur Jain temples - 95 km away from Udaipur (nearest Airport), 14th-century Jain temples are famous for their sculpture, stone carving & pullers structure. Surrounding the Aravali mountain range adds natural beauty with spirituality. Pali Marwar is the nearest railway station. Best to go in rainy & winter /spring seasons.  3. Chittorgarh Fort (Rajasthan) - One of the biggest habitat forts of India, with over 900 years of h...

श्रीमद्भगवद् गीता- सार संक्षेप

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श्रीमद्भगवद् गीता भारतीय दर्शन एवं धर्म की सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली पुस्तक है। इसे आदि शास्त्र भी कहा जाता है। इसमें मानवीय जीवन के आध्यात्मिक उत्कर्ष के सहज-सरल सूत्र दिए गए हैं , जिनका पालन कर प्रत्येक जीवात्मा ऊर्ध्व गति में गमन करती है। श्रीमद्भगवद् गीता की इतनी समीक्षाएं , अर्थ एवं टिप्पणियां की गई हैं , जितनी शायद ही विश्व के किसी धर्म ग्रंथ की की गई हो। वस्तुतः भगवान श्री कृष्ण ने तो कोई एक श्लोक- एक बात कही , लेकिन सब टीकाकारो- ऋषियों ने   अपने-अपने प्रकार से आशय ग्रहण कर , इसे समझा एवं समीक्षाएं की। कुछ प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से हम इस ग्रंथ को समझने का प्रयत्न करेंगे। १. श्रीमद्भगवद् गीता में 18 अध्याय हैं और इसमें करीब 700 श्लोक हैं। इसमें चार पात्र है , भ गवान श्री कृष्ण , अर्जुन , संजय एवम् धृतराष्ट्र । इसमें पांच विषय वस्तु पर चर्चा है ईश्वर , जीव , प्रकृति , काल और कर्म। २. श्रीमद्भगवद्गीता प्रमुख रूप से कर्म योग की शिक्षा प्रदान करता है एवं भगवान श्री कृष्ण को योगेश्वर , योगीराज , कर्मयोगी कहा गया है। इसके अध्याय 2, 3, 4, 5 में कर्मयोग का सार पूर्ण विवरण...

विवेक हीनता (पोपाबांई का राज)

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  स्वल्प शब्दों में समग्र दर्शन के अंतर्गत पापा जी सोहन राज जी कोठारी का लोकोक्तियों पर लिखा गया यह लेख विवेक के बारे में हैं। इसमें हमें बताया गया है कि वर्तमान समय में भी विवेकहीनता सामने आ रही है। यह हम सबके लिए एक चिंतनीय विषय है। लेख को पढ़कर स्वयं गौर करें और मनन करें। वर्तमान जीवन में कैसे सार्थकता लाएं ? यह सोचें।   --- मर्यादा कुमार कोठारी   विवेक हीनता ( पोपाबांई का राज ) पोपाबांई का कब , कहां , कैसा राज्य रहा , इसके बारे में ऐतिहासिक या प्रमाणिक जानकारी कहीं नहीं मिलती। इस लोकोक्ति का प्रयोग बहुधा उन प्रसंगों व परिस्थितियों में होता है , जहां विवेक से अपना-पराया , हित-अहित , शुभ-अशुभ , करणीय-अकरणीय आदि का पृथक्करण नहीं किया जाता है और मनमाने तरीके से विवेक के बिना उटपटांग कार्यप्रणाली अपनाली जाती है। इस लोकोक्ति के विषय में ‘ सोमरस ’ रचयिता आचार्यश्री तुलसी ने पुस्तक के परिशिष्ट में संख्या 63 पर एक विस्तृत घटना दी , जो इस प्रकार है- प्राचीन समय में , दो वणिकों ने आपस में गोलमिर्च (काली मिर्च) का व्यापार किया। उस समय तोल-माप के यंत्रों का आविष्कार...