☝🏼 एक छोटी सी कहानी सुहानी: “तुम अचानक सफल कैसे हो गए?” संभव: “अचानक नहीं… 10 साल रोज़ थोड़ा-थोड़ा। ” 👉🏼 सफलता अचानक नहीं आती — रोज़ की छोटी मेहनत से बनती है। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी अर्पित: “मुझे बहुत समस्याएँ हैं।” तरीन: “तो तुम जिंदा हो… मुर्दों के पास कोई समस्या नहीं होती। ” 👉🏼 समस्याएँ जीवन का प्रमाण हैं। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी ऋतु: “बस छोटा सा झूठ था।” गिरवर: “झूठ छोटा नहीं होता… वो विश्वास छोटा कर देता है।” 👉🏼 विश्वास टूटने में एक झूठ ही काफी है। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी राघव (पिता): “फोन छोड़ो, परिवार से बात करो। ” माधव (पुत्र): “ पहले आप छोड़िए… ” कमरे में अचानक सन्नाटा हो गया। 👉🏼 उपदेश से ज्यादा असर उदाहरण का होता है। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी जीतू : “मुझे बहुत जल्दी गुस्सा आता है।” मीतू : “गुस्सा जल्दी नहीं आता… हम उसे जल्दी आने देते हैं।” 👉🏼 भावनाएँ हमारे बस में नहीं, पर प्रतिक्रिया हमारे बस में होती है। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी विनोद (आए दिन): “समाज खराब हो गया है।” एक दिन दादा जी: “समाज कोई और नहीं… तुम और मैं ही हैं। ” 👉🏼 बदलाव की शुरुआत हमसे होती है। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी प्रीतम (पिता): “बेटा, झूठ मत बोलना।” कुछ देर बाद... फोन आया… प्रीतम: “ बोल दो पापा घर पर नहीं हैं।” बेटा चुप रहा। 👉🏼 बच्चे हमारी बातें नहीं, हमारा व्यवहार सीखते हैं। श्रैयाँस कोठारी