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एक छोटी सी कहानी 278

☝🏼 एक छोटी सी कहानी सुमित: “मैं दुनिया बदलूँगा।” विपुल: “पहले अपना व्यवहार बदल।” कुछ दिन बाद… लोगों का उसके प्रति सम्मान बढ़ गया... 👉 खुद को बदलो, दुनिया अपने आप बदलने लगेगी। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 277

☝🏼एक छोटी सी कहानी नरेश: “तू ही हमेशा झुकता क्यों है?” सुरेश (भाई) हंसा: “क्योंकि मुझे रिश्ता जीतना है, बहस नहीं। ” कमरे में सन्नाटा… और रिश्ते में शांति आ गई। 👉 जो झुक सकता है, वही रिश्तों को बचा सकता है। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 276

  ☝🏼 एक छोटी सी कहानी ललित: “हर दिन इतना पॉज़िटिव कैसे रहती हो?” सीमा: “मैं बस हर सुबह खुद से कहती हूँ — आज अच्छा होगा।” ललित: “और सच में होता है?” सीमा: “ज्यादातर… हाँ।” 👉🏼जैसा सोचते हो, वैसा बनने लगता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 275

☝🏼 एक छोटी सी कहानी सास : “तुमने मुझसे पूछा ही नहीं…” बहू: “ डरती थी कि आप मना कर देंगी…” सास की आँखें भर आईं — “मैं माँ हूँ… दुश्मन नहीं ।” 👉 डर ने दूरी बनाई… प्यार तो पहले से था। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 274

☝🏼 एक छोटी सी कहानी सुहानी: “तुम अचानक सफल कैसे हो गए?” संभव: “अचानक नहीं… 10 साल रोज़ थोड़ा-थोड़ा। ” 👉🏼 सफलता अचानक नहीं आती — रोज़ की छोटी मेहनत से बनती है। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 273

☝🏼 एक छोटी सी कहानी अर्पित: “मुझे बहुत समस्याएँ हैं।” तरीन: “तो तुम जिंदा हो… मुर्दों के पास कोई समस्या नहीं होती। ” 👉🏼 समस्याएँ जीवन का प्रमाण हैं। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 272

☝🏼 एक छोटी सी कहानी ऋतु: “बस छोटा सा झूठ था।” गिरवर: “झूठ छोटा नहीं होता… वो विश्वास छोटा कर देता है।” 👉🏼 विश्वास टूटने में एक झूठ ही काफी है। श्रैयाँस कोठारी