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एक छोटी सी कहानी 281

☝🏼 एक छोटी सी कहानी अरिहंत: "तुमने पैसे वापस क्यों किए?" नीरज: "मां ने सिखाया है, जो हमारा नहीं वो रखना गलत है।" उसकी आंखों में सच्चाई चमक रही थी। 👉🏼 अच्छी परवरिश इंसान की सबसे बड़ी पूंजी होती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी 

एक छोटी सी कहानी 280

☝🏼 एक छोटी सी कहानी संजीव: "सब खत्म हो गया..." मां मुस्कुराईं, " सूरज डूबता है तो अगली सुबह और चमककर आता है। " 👉🏼 अंधेरा हमेशा रोशनी को जन्म देता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 279

☝🏼 एक छोटी सी कहानी गीता: “हमारे पास इतना कम है…” मोहित (पति): “ पर हम साथ हैं ।” गीता के चेहरे पर संतोष वाली मुस्कान थी... 👉 खुशियाँ चीज़ों में नहीं, साथ में होती हैं। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 278

☝🏼 एक छोटी सी कहानी सुमित: “मैं दुनिया बदलूँगा।” विपुल: “पहले अपना व्यवहार बदल।” कुछ दिन बाद… लोगों का उसके प्रति सम्मान बढ़ गया... 👉 खुद को बदलो, दुनिया अपने आप बदलने लगेगी। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 277

☝🏼एक छोटी सी कहानी नरेश: “तू ही हमेशा झुकता क्यों है?” सुरेश (भाई) हंसा: “क्योंकि मुझे रिश्ता जीतना है, बहस नहीं। ” कमरे में सन्नाटा… और रिश्ते में शांति आ गई। 👉 जो झुक सकता है, वही रिश्तों को बचा सकता है। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 276

  ☝🏼 एक छोटी सी कहानी ललित: “हर दिन इतना पॉज़िटिव कैसे रहती हो?” सीमा: “मैं बस हर सुबह खुद से कहती हूँ — आज अच्छा होगा।” ललित: “और सच में होता है?” सीमा: “ज्यादातर… हाँ।” 👉🏼जैसा सोचते हो, वैसा बनने लगता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 275

☝🏼 एक छोटी सी कहानी सास : “तुमने मुझसे पूछा ही नहीं…” बहू: “ डरती थी कि आप मना कर देंगी…” सास की आँखें भर आईं — “मैं माँ हूँ… दुश्मन नहीं ।” 👉 डर ने दूरी बनाई… प्यार तो पहले से था। श्रैयाँस कोठारी