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एक छोटी सी कहानी 365

☝🏼 एक छोटी सी कहानी पापा - "365 हो गयी... तु खुद लिख रहा है या AI से ...?" मैं - “ हथौड़ा कभी घर नहीं बनाता... विचार मेरे हैं , AI कभी कभी शब्दों को तराश सकती है, पर 365 दिन तक रोज़ एक ईंट रखना मेरा काम, बाकि मोटिवेशन दादोसा का व आपका और स्नेह सभी पाठकों का।” 👉असाधारण परिणाम अक्सर साधारण निरंतरता से जन्म लेते हैं।  🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 364

☝🏼 एक छोटी सी कहानी नीतू - “अब हमारे बीच झगड़े काम हो गए हैं?” विनय - “क्योंकि अब मैं तुम्हारे चेहरे को देखता हूँ, नोटिफिकेशन को नहीं।” 👉वक्त और ध्यान ही किसी रिश्ते की सबसे बड़ी खुराक है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 363

☝🏼एक छोटी सी कहानी भरत: "मैं थक कर हर बार आखिरी कदम पर रुक जाता हूँ..." चन्दन: "पत्थर आखिरी चोट से ही टूटता है।" 👉ज्यादातर लोग अपनी जीत के ठीक एक कदम पहले मैदान छोड़ देते हैं।  🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 362

☝🏼 एक छोटी सी कहानी Jelly - “मुझे जल्दी रिजल्ट चाहिए…” दादा - “भुट्टा भी धीमी आँच पर अच्छा पकता है, तेज पर तो काला होता है, कच्चा भी रह जाता है। ” 👉अच्छी चीजें समय लेती हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 361

☝🏼एक छोटी सी कहानी जेठालाल: “इतनी छोटी भूल, इतना बड़ा नुकसान?” तारक: “दरार छोटी थी… लेकिन अनदेखी बड़ी।” 👉कई संकट अचानक नहीं, धीरे-धीरे बनते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 360

☝🏼 एक छोटी सी कहानी रमेश: “सब लोग उसकी हाँ में हाँ क्यों मिला रहे थे?” पंकज: “क्योंकि सच बोलने की कीमत लगती है।” 👉🏼 भीड़ अक्सर सुविधा के साथ खड़ी होती है।  👉🏼 जो कीमत नहीं चुका सकते, वो अक्सर समझौते को 'हाँ' कह देते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 359

☝🏼 एक छोटी सी कहानी स्वस्ति: “सच बोल दिया?” निवृत्ति: “हाँ… अब रोज रोज डरना नहीं पड़ेगा।” 👉🏼 एक बार की हिम्मत, रोज का डर मिटा देती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी