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एक छोटी सी कहानी 284

☝🏼 एक छोटी सी कहानी पृथ्वीराज: "सब छोड़ गए…" ओमप्रकाश (कंधे पर हाथ रखा): "मैं नहीं जाऊंगा,"  👉🏼 सच्चे दोस्त मुश्किल समय में साथ खड़े रहते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 283

☝🏼 एक छोटी सी कहानी अभिषेक: "अब कुछ नहीं बचा…" विवेक: "एक चीज बची है… उम्मीद ।" 👉🏼 उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी 

एक छोटी सी कहानी 282

☝🏼 एक छोटी सी कहानी जॉन्टी: "कब मिलेगा रिजल्ट?" जैली: "जब सही समय आएगा… धीरज रख।" 👉🏼 फल सही समय पर ही मिलता है, उसके लिए धैर्य तो रखना ही होता है 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी 

एक छोटी सी कहानी 281

☝🏼 एक छोटी सी कहानी अरिहंत: "तुमने पैसे वापस क्यों किए?" नीरज: "मां ने सिखाया है, जो हमारा नहीं वो रखना गलत है।" उसकी आंखों में सच्चाई चमक रही थी। 👉🏼 अच्छी परवरिश इंसान की सबसे बड़ी पूंजी होती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी 

एक छोटी सी कहानी 280

☝🏼 एक छोटी सी कहानी संजीव: "सब खत्म हो गया..." मां मुस्कुराईं, " सूरज डूबता है तो अगली सुबह और चमककर आता है। " 👉🏼 अंधेरा हमेशा रोशनी को जन्म देता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 279

☝🏼 एक छोटी सी कहानी गीता: “हमारे पास इतना कम है…” मोहित (पति): “ पर हम साथ हैं ।” गीता के चेहरे पर संतोष वाली मुस्कान थी... 👉 खुशियाँ चीज़ों में नहीं, साथ में होती हैं। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 278

☝🏼 एक छोटी सी कहानी सुमित: “मैं दुनिया बदलूँगा।” विपुल: “पहले अपना व्यवहार बदल।” कुछ दिन बाद… लोगों का उसके प्रति सम्मान बढ़ गया... 👉 खुद को बदलो, दुनिया अपने आप बदलने लगेगी। श्रैयाँस कोठारी