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एक छोटी सी कहानी 239

☝🏼 एक छोटी सी कहानी आगम : अरे यार, रविवार है… आराम कर ले। संभव : बस 1 घंटा प्लानिंग कर लूँ, फिर आराम। साल के अंत में वही सबसे आगे था… बाकी लोग अभी सोच रहे थे। 👉🏼 रोज़ की छोटी निरंतरता ही बड़ी सफलता बनाती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 238

☝🏼 एक छोटी सी कहानी मनन : लोग क्या कहेंगे? हार्दिक : “लोग बाद में जरूर पूछेंगे, कैसे किया?” उसने स्टार्ट किया। 👉🏼 डर छोड़ो, शुरुआत करो। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 237

☝🏼 एक छोटी सी कहानी जानकी: हमारे समय में सब संभाल लेते थे। मधु (बहू): मम्मीजी, मैं भी कोशिश कर रही हूँ… बस साथ चाहिए। अगले दिन सास ने रसोई में हाथ बँटा दिया… घर में शांति आ गई। 👉🏼 सास-बहू का रिश्ता ताने से नहीं, साथ से बनता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 236

☝🏼 एक छोटी सी कहानी ममता : हर बार मेरी ही गलती क्यों? झगड़ा बढ़ता गया…  घर में सन्नाटा छा गया। अर्हम (पति) ने धीरे से कहा, “sorry, झगड़ा खत्म करते हैं।” और वही घर फिर हँस पड़ा। 👉🏼 रिश्ते बहस से नहीं, समय पर बोले गए “सॉरी” से बचते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 235

☝🏼 एक छोटी सी कहानी पहली डील कैंसल। टीम मायूस। फाउंडर बोला, “ सीखा क्या… वही हमारी कमाई है।” 👉🏼 हर फेलियर एक फ्री कोर्स है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 234

☝🏼 एक छोटी सी कहानी बड़ा भाई : चलो, जमीन बराबर बाँट लेते हैं… झगड़ा खत्म। छोटा भाई: हाँ, बीच में दीवार खड़ी कर देते हैं। दीवार तो खड़ी हो गई… पर आँगन के साथ बातें भी आधी रह गईं। घर बड़ा दिखा, पर परिवार छोटा हो गया। 👉🏼 जमीन बाँटने से हिस्से मिलते हैं, दिल बाँटने से अपने खो जाते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 233

☝🏼 एक छोटी सी कहानी अमित : पैसा नहीं है, बिजनेस कैसे शुरू करूँ? विनय : आइडिया से शुरू तो कर , पैसा पीछे आएगा। उसने घर से छोटा काम शुरू किया। 👉🏼 शुरुआत बड़ी नहीं, हिम्मत बड़ी होनी चाहिए। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी