Posts

एक छोटी सी कहानी 363

☝🏼एक छोटी सी कहानी भरत: "मैं थक कर हर बार आखिरी कदम पर रुक जाता हूँ..." चन्दन: "पत्थर आखिरी चोट से ही टूटता है।" 👉ज्यादातर लोग अपनी जीत के ठीक एक कदम पहले मैदान छोड़ देते हैं।  🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 362

☝🏼 एक छोटी सी कहानी Jelly - “मुझे जल्दी रिजल्ट चाहिए…” दादा - “भुट्टा भी धीमी आँच पर अच्छा पकता है, तेज पर तो काला होता है, कच्चा भी रह जाता है। ” 👉अच्छी चीजें समय लेती हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 361

☝🏼एक छोटी सी कहानी जेठालाल: “इतनी छोटी भूल, इतना बड़ा नुकसान?” तारक: “दरार छोटी थी… लेकिन अनदेखी बड़ी।” 👉कई संकट अचानक नहीं, धीरे-धीरे बनते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 360

☝🏼 एक छोटी सी कहानी रमेश: “सब लोग उसकी हाँ में हाँ क्यों मिला रहे थे?” पंकज: “क्योंकि सच बोलने की कीमत लगती है।” 👉🏼 भीड़ अक्सर सुविधा के साथ खड़ी होती है।  👉🏼 जो कीमत नहीं चुका सकते, वो अक्सर समझौते को 'हाँ' कह देते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 359

☝🏼 एक छोटी सी कहानी स्वस्ति: “सच बोल दिया?” निवृत्ति: “हाँ… अब रोज रोज डरना नहीं पड़ेगा।” 👉🏼 एक बार की हिम्मत, रोज का डर मिटा देती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 358

☝🏼एक छोटी सी कहानी सुनील: “काम शुरू करने की प्रेरणा नहीं मिल रही…” गुरुजी: “सूरज प्रतिदिन किसी की तालियों या प्रशंसा या मोटिवेशन से नहीं निकलता।” 👉🏼 अनुशासन, मोटिवेशन से ज्यादा जरूरी है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 357

☝🏼 एक छोटी सी कहानी पिंकी: “सबको वही बात सच क्यों लगी?” रेखा: “क्योंकि लोगों को सच नहीं… मसाला पसंद आया।” 👉🏼 भीड़ अक्सर वही मानती है, जो सुनने में मजेदार लगे; सही हो यह जरूरी नहीं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी