☝🏼 एक छोटी सी कहानी जीतू : “मुझे बहुत जल्दी गुस्सा आता है।” मीतू : “गुस्सा जल्दी नहीं आता… हम उसे जल्दी आने देते हैं।” 👉🏼 भावनाएँ हमारे बस में नहीं, पर प्रतिक्रिया हमारे बस में होती है। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी विनोद (आए दिन): “समाज खराब हो गया है।” एक दिन दादा जी: “समाज कोई और नहीं… तुम और मैं ही हैं। ” 👉🏼 बदलाव की शुरुआत हमसे होती है। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी प्रीतम (पिता): “बेटा, झूठ मत बोलना।” कुछ देर बाद... फोन आया… प्रीतम: “ बोल दो पापा घर पर नहीं हैं।” बेटा चुप रहा। 👉🏼 बच्चे हमारी बातें नहीं, हमारा व्यवहार सीखते हैं। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी अभीर : “मुझे डर लग रहा है।” आरोही : “10वीं में टॉप किसने किया था?” "मैंने", बोल अभीर मुस्कुराया। 👉 पुरानी जीत, आज का आत्मविश्वास बनाती हैं। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी सिद्धि: “लोग मुझे disturb कर देते हैं।” रजनीश: “दरवाज़ा किसने खोला?” 👉 बिना अनुमति कोई आपके मन में प्रवेश नहीं कर सकता। श्रैयाँस कोठारी