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एक छोटी सी कहानी 354

☝🏼एक छोटी सी कहानी गौतम, “मेरे पास बहुत प्लान हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही…” शरद, “भाई, सिर्फ नक्शा होने से घर नहीं बनता, ईंट भी उठानी पड़ती है। ” 👉🏼 योजना को सफल बनाने के लिए लगातार मेहनत जरूरी है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 353

☝🏼 एक छोटी सी कहानी दुर्गेश,“मैं अकेला क्या कर पाऊँगा?” समता (माँ), “एक छोटा दीपक भी पूरे कमरे का अंधेरा मिटा देता है।” 👉🏼 छोटी कोशिश भी बड़ा असर ला सकती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी 

एक छोटी सी कहानी 352

☝🏼 एक छोटी सी कहानी कमला (माँ) “इतना शांत कैसे रहता है?” गौतम (पुत्र) “मैं हर बात का जवाब तुरंत देना छोड़ चुका हूँ।” 👉 कई समस्याएँ समय से शांत होती हैं, शब्दों से नहीं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी 

एक छोटी सी कहानी 351

☝🏼 एक छोटी सी कहानी नेहा: “तुम्हारा idea इतना अलग कैसे निकला?” तरीन: “मैंने सिर्फ लोगों की नकल करना बंद कर दिया…” 👉🏼 पहचान अक्सर भीड़ से थोड़ा अलग सोचने पर बनती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी 

एक छोटी सी कहानी 350

☝🏼 एक छोटी सी कहानी प्रीति: “तुझे क्यों लगता है कि सब ठीक हो जाएगा?” प्रीत: “ क्योंकि रात रोज हारती है… सुबह रोज जीतती है।” 👉 उम्मीद प्रकृति का सबसे सुंदर नियम है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 349

☝🏼एक छोटी सी कहानी लवली: “दीदी, बच्चे जिद्दी क्यों हैं?” जॉली: “हर बार चीजें देकर, हमने ‘ना’ सुनना सिखाया ही नहीं।” 👉इच्छा आसानी से पूरी होने लगे, तो इंतज़ार धीरे-धीरे असहनीय लगने लगता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 348

☝🏼एक छोटी सी कहानी चिन्मय: “भाई इतना टेंशन किस बात का?” हर्ष: “हर काम खुद करने की आदत छोड़ नहीं पा रहा।” 👉कई लोग काम के बोझ से नहीं, “मेरे बिना नहीं होगा” वाली सोच से थक जाते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी