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एक छोटी सी कहानी 258

☝🏼 एक छोटी सी कहानी अनिल : “वाह! कितनी डिग्रियाँ हैं!” सुनील (गर्व से): “हाँ, बहुत पढ़ा हूँ,” अगले ही पल कटु शब्द निकल गए। अनिल : “पढ़ाई पूरी है…  पर संस्कार की क्लास अभी बाकी है।” 👉 डिग्रियों से करियर बनता है, संस्कारों से व्यक्तित्व। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 257

☝🏼 एक छोटी सी कहानी शकुंतला : “आज शक्कर कम है…” प्रियंका (बहू): “प्यार पूरा है, मम्मीजी।” सास हँस पड़ीं, “शक्कर तो डिब्बे में है… पर घर की मिठास तुम्हारे व्यवहार से ही आती है ।” 👉 रिश्ते मीठे तब होते हैं, जब दोनों थोड़ा-थोड़ा जोड़ते हैं। 💛 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 256

☝🏼एक छोटी सी कहानी संदीप : “लड़की गोरी होनी चाहिए।” तरुण : “चरित्र का कोई भी रंग चलेगा?” 👉 सुंदरता रंग में नहीं, चरित्र में होती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 255

☝🏼 एक छोटी सी कहानी प्रकाश : “मर्द रोते नहीं।” कमलेश : “तो दर्द कहाँ जाएगा?” 👉 आँसू कमजोरी नहीं, इंसानियत हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 254

☝🏼 एक छोटी सी कहानी कैलाश : “कार्य तो सही है, पर समाज क्या कहेगा!” पुष्प : “समाज खुश कब होता है?” 👉 जो सही है, वही करो — समाज बाद में समझेगा। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 253

☝🏼 एक छोटी सी कहानी “5-star होटल में ही पार्टी करेंगे!” रोनित ने हंसते हंसते बिल का भुगतान किया। वापस आते हुए ठेले वाले से— “भैया, 10 रुपये कम कर दो।” 👉 दिखावा बड़ा, दिल छोटा नहीं होना चाहिए। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 252

☝🏼 एक छोटी सी कहानी नम्रता (सास): “रसोई बहू की ज़िम्मेदारी है।” समीर (ससुर):“ भूख तो सबको लगती है, यह तुमने ही कहा था जब तुम सास नहीं, सिर्फ बहु थी… ” 👉 घर काम से नहीं, सहयोग से चलता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी