Posts

एक छोटी सी कहानी 242

☝🏼 एक छोटी सी कहानी रतन : यार, पूरा दिन भागा… फिर भी कुछ हुआ नहीं। सोहन : मैं तो सुबह 5 काम लिखता हूँ… शाम तक टिक लगा देता हूँ। एक भागता रहा, एक बढ़ता रहा। 👉🏼 जो लिखता है वो पूरा करता है, बाकी सिर्फ सोचते रह जाते हैं। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 241

☝🏼 एक छोटी सी कहानी अथर्व : “मम्मी, एक बार ये समझा दो?” टीना (मां): अभी नहीं, अभी dusting बाकी है... घर सुंदर था…  बचपन खाली। 👉🏼 घर नहीं, बचपन सजाना ज्यादा जरूरी है। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 240

☝🏼 एक छोटी सी कहानी सरिता : थोड़ा बचा लें? सुरेश (पति): बाद में देखेंगे। अचानक बीमारी आई…  तब बचत की कीमत समझ आई। 👉🏼 बचाया हुआ एक पैसा भी कमाया हुआ एक नए पैसे के बराबर। श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 239

☝🏼 एक छोटी सी कहानी आगम : अरे यार, रविवार है… आराम कर ले। संभव : बस 1 घंटा प्लानिंग कर लूँ, फिर आराम। साल के अंत में वही सबसे आगे था… बाकी लोग अभी सोच रहे थे। 👉🏼 रोज़ की छोटी निरंतरता ही बड़ी सफलता बनाती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 238

☝🏼 एक छोटी सी कहानी मनन : लोग क्या कहेंगे? हार्दिक : “लोग बाद में जरूर पूछेंगे, कैसे किया?” उसने स्टार्ट किया। 👉🏼 डर छोड़ो, शुरुआत करो। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 237

☝🏼 एक छोटी सी कहानी जानकी: हमारे समय में सब संभाल लेते थे। मधु (बहू): मम्मीजी, मैं भी कोशिश कर रही हूँ… बस साथ चाहिए। अगले दिन सास ने रसोई में हाथ बँटा दिया… घर में शांति आ गई। 👉🏼 सास-बहू का रिश्ता ताने से नहीं, साथ से बनता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 236

☝🏼 एक छोटी सी कहानी ममता : हर बार मेरी ही गलती क्यों? झगड़ा बढ़ता गया…  घर में सन्नाटा छा गया। अर्हम (पति) ने धीरे से कहा, “sorry, झगड़ा खत्म करते हैं।” और वही घर फिर हँस पड़ा। 👉🏼 रिश्ते बहस से नहीं, समय पर बोले गए “सॉरी” से बचते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी