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आचार्य भिक्षु के स्टार्टअप टूल्स

आचार्य भिक्षु के startup tools  स्थान: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी विषय: स्टार्टअप मैनेजमेंट – स्थायित्व, नैतिकता और नेतृत्व कक्षा की शुरुआत होती है। प्रोफेसर जॉन रे आज कुछ अलग ही मूड में हैं। छात्र अपनी नोटबुक खोलते हैं, सोचते हैं आज किसी यूनिकॉर्न स्टार्टअप की चर्चा होगी। लेकिन जैसे ही प्रोजेक्टर चालू होता है, स्क्रीन पर एक नाम चमकता है: “ Acharya Bhikshu – एक संत, एक सिस्टम, एक स्टार्टअप ” कक्षा में हलचल होती है। एक छात्र बुदबुदाता है — "सर, ये कोई साधु हैं क्या? उनका स्टार्टअप से क्या लेना-देना?" प्रोफेसर मुस्कुराते हुए कहते हैं: जब आज की युवा पीढ़ी किसी स्टार्टअप की बात करती है, तो वह इनोवेशन, वैल्यू क्रिएशन, और लीडरशिप को केंद्र में रखती है। पर सोचिए — अगर हम आपको बताएं कि 18वीं सदी में एक ऐसे संत थे जिन्होंने धर्म के क्षेत्र में ऐसा स्टार्टअप खड़ा किया, जिसकी वैल्यू आज भी लाखों लोगों के जीवन को दिशा देती है? वह स्टार्टअप था — तेरापंथ, और उसके फाउंडर थे — आचार्य भिक्षु।  “कहा जाता है अच्छे से अच्छा बिजनेस भी तीन पीढ़ियां या 100 वर्षों से अधिक नहीं चल पाता है, आज मैं आपको एक ...

एक छोटी सी कहानी 46

☝🏼 एक छोटी सी कहानी पूरा परिवार एक ही रूम में थे… मगर हर कोई स्क्रीन में गुम। सबसे छोटी बेटी धीरे से बोली – “काश मैं भी मोबाइल होती… ताकि आप मुझे भी थोड़ी अटेंशन देते ।” 👉 परिवार की असली ‘कनेक्टिविटी’ स्नेह में, बातों में होती है, नेटवर्क में नहीं। 👉 रिश्ते चार्जर से नहीं, 'ध्यान' से चलते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 45

☝🏼 एक छोटी सी कहानी 👦 बेटा: "पापा, ज़रा बात करनी थी..." 👨‍🦱 पापा Instagram में बिज़ी रहे। कुछ साल बाद... 👴 पापा: "बेटा, तुझसे बात करनी थी..." 👦 बेटा मोबाइल में खोया रहा। 👉🏼 मोबाइल पल भर का साथी है, अपनों का साथ उम्रभर की पूंजी। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 44

☝🏼एक छोटी सी कहानी आरव रोज chips, burger, pizza आदि खाता था। एक दिन दादाजी बोले: "तेरे पापा भी यही सब खाते थे... अब डॉक्टर की list में top कर रहे हैं।" आरव बोला-  "मैं health में top करना चाहता हूँ, हॉस्पिटल में नहीं, अब से इन सबको ना बाबा ना। " 👉🏼 असली cool वही है जो healthy जीता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 43

☝🏼 एक छोटी सी कहानी 👴 दादाजी हर सुबह पार्क में तेज़ चलकर आते थे। 👦 पोता बोला – "इतनी उम्र में ये सब क्यों? आराम करिए ना!" दादाजी मुस्कराए – "बेटा, ज़िंदगी लंबी नहीं, स्वस्थ चाहिए... ताकि अपने पैरों पर मुस्कुरा सकूं, दूसरों के सहारे नहीं।" 👉🏼" स्वस्थ शरीर ही असली संपत्ति है — इसकी कीमत बीमार पड़ने के बाद मत समझो।" 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 42

☝🏼 एक छोटी सी कहानी पिंकी : पापा जूता फट गया है, चलो नया ले आते हैं. अगले दिन पापा ने जूता repair करवाया और पिंकी की गुल्लक में ₹500 डाले... 👉🏼 फिजूलखर्ची रोकना : sacrifice (बलिदान) नहीं, कल के लिए निवेश है 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 41

☝🏼एक छोटी सी कहानी पड़ोसी का ताना – "बहुएं आजकल हाथ में हमेशा फोन लिए रहती हैं।” सास मुस्कुराई – "हाँ, तभी तो रोज़ मेरी दवा का अलार्म बजता है, और फ़ोन से मेरा वीडियो कॉल डॉक्टर से हो जाता है।” 👉 समझदारी की आँख रखने वालों को हर पीढ़ी में खूबसूरती दिखती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी