एक छोटी सी कहानी 336

☝🏼एक छोटी सी कहानी

भागवंती (नई बहू): “माँजी, रसोई आपकी है, मैं क्या करूँ?”

दमयंती (सास): “बेटी, रसोई अब हमारी है… तुम सब्ज़ी बनाओ, मैं रोटियाँ सेंकती हूँ।”

👉🏼जहाँ “मेरी” से “हमारी” हो जाए, वहाँ घर सचमुच घर बन जाता है। 🏡✨

श्रैयाँस कोठारी

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