☝🏼 एक छोटी सी कहानी सुधीर: मुझे लगता है हमारे रिश्तों में कहीं न कहीं दूरी आ गई है। ज्योति: हाँ, क्योंकि दरवाज़ा तो खुला ही नहीं है। सुधीर: कौन-सा दरवाज़ा? ज्योति: हमारे मन का दरवाज़ा🚪, बाहर 💖प्यार, 🫂अपनापन और 😇शांति खटखटा रहे हैं, पर भीतर से लगी छोटी-छोटी शिकायतों 🤬 और ego की कुंडी उन्हें रोक रही हैं। सुधीर: तो हल क्या है? ज्योति: बस एक चाबी 🔑 — क्षमा। जैसे ही हम क्षमा कर दें, कुंडी खुल जाएगी , और भीतर फिर से ✨रौशनी और सुकून भर जाएगा। 🌸 बारम्बार खमत खामणा 🌸 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी