हर हर गंगे
भारत विविधताओं से भरा हुआ देश हैं। यहां हर दिन त्यौहार है , हर दिन कोई न कोई नयी बात है , हर दिन कोई न कोई नया राग है , नया रंग है। अलग-अलग भाषा , अलग-अलग भूषा , अलग-अलग भोजन होते हुए भी हम सब एक हैं । एक बनाने में यहां के वातावरण , यहां की भौगोलिक स्थिति , यहाँ की तहजीब , यहाँ के रीति रिवाज , यहाँ की परंपराओं , सनातन काल से चली आ रही धारणाओं का बहुत बड़ा योगदान है। मैं आज बात करना चाहूंगा गंगा नदी के बारे , अभी कुछ दिन पहले मैंने अखबार में पढ़ा गंगा दशहरा । मेरी जिज्ञासा हुई गंगा दशहरा के बारे में पता कर ने की । मैंने जानकारी लेने की कोशिश की तो पाया कि जेयष्ठ शुक्ला दशमी को गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था। उस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जा ता है । गंगा का अवतरण कहा यह जाता है स्वर्ग से हुआ था। बताया यह जाता है भगवान विष्णु के ब्रह्मा जी ने चरण पखारे थे और कुछ जल को अपने कमंडल में भर लिया था। एक कथा यह भी है भगवान त्रय विष्णु , ब्रह्मा और शिवजी नाच रहे थे , नाचते समय में भगवान विष्णु को जो पसीना हुआ उस पसीने को ब्रह्मा जी ने अपने कमंड...