एक छोटी सी कहानी 287

☝🏼एक छोटी सी कहानी

पवन: “दिनभर भाग रहा हूँ, फिर भी सब बिखरा है…”

पंकज: “कभी रुका भी है समझने के लिए, कि क्या हो रहा है?”

👉🏼बिना रुके दौड़ना, व्यस्तता नहीं… अस्त-व्यस्तता है।

श्रैयाँस कोठारी

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