एक छोटी सी कहानी 269

☝🏼एक छोटी सी कहानी

विनोद (आए दिन): “समाज खराब हो गया है।”

एक दिन दादा जी: “समाज कोई और नहीं… तुम और मैं ही हैं।

👉🏼बदलाव की शुरुआत हमसे होती है।

श्रैयाँस कोठारी

Comments

  1. आचार्य तुलसी के
    भी सुने यही विचार

    चाहते हैं हो मगर
    कैसे होगा सुधार

    भीतर की ओर ही
    खुला करते हैं ये द्वार

    एक सत्य - अनेक शब्द
    सुन रहे हैं बार-बार
    ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    "सुधरे व्यक्ति, समाज व्यक्ति से, राष्ट्र स्वयं सुधरेगा..."
    "जागें स्वयं, जगाएं जग को...."

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