एक छोटी सी कहानी 244
☝🏼एक छोटी सी कहानी
सुमित: जल्दी-जल्दी दौड़ूँगा, जल्दी जीतूँगा।
विपुल: मैं रोज थोड़ा-थोड़ा चलूँगा।
सुमित थककर रुक गया… विपुल धीरे-धीरे मंज़िल तक पहुँच गया।
👉🏼 धीमी निरंतरता, तेज़ शुरुआत से ज्यादा ताकतवर होती है।
श्रैयाँस कोठारी
इस छोटी कहानी को पढ़कर बचपन में पढ़ी कहानी खरगोश व कछुआ की याद आ गई।
ReplyDeleteये बात हर काल में लागू होती हैं।