Harshi: Can a story be short, concise, thought provoking and entertaining?? Bhavya: Yes, it can all this and much more. Harshi: How?? Bhavi: Read Gyanam's Gyan - blog by Shreyansh Kothari
☝🏼 एक छोटी सी कहानी दो बीज ज़मीन में पड़े थे। पहला बोला – "मैं अभी अंकुर नहीं फूटाऊंगा, मुझे डर है कहीं मुझे कुछ हो न जाए।" दूसरा बोला – "जो होगा देखा जाएगा।" वो अंकुर बना, पौधा बना, पेड़ बना। पहले बीज को एक मुर्गी ने खा लिया। 👉 जो रिस्क से डरता है, वो ज़िंदगी से बाहर हो जाता है। 🌳🐔💥 श्रैयाँस कोठारी
आज मैं आपके साथ कुछ बात करूंगा - जैन धर्म के तेरापंथ संप्रदाय की। जैन धर्म आदि - अनादि काल से चला रहा है। जिसके इस अवसर पिणी काल में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ हुए , और उनके बाद 23 तीर्थंकर और हुए। चरम तीर्थंकर भगवान महावीर थे । भगवान महावीर से वर्तमान तक अढ़ाई हज़ार वर्ष बाद तक जैन धर्म चला आ रहा है। इस जैन धर्म में मानने वालों में दो मान्यताएं हैं श्वेतांबर एवं दिगंबर। इनमें भी दो अलग - अलग हैं मूर्तिपूजक व अ मूर्तिपूजक । मैं यहां केवल जैन धर्म के तेरापंथ संप्रदाय की बात करूंगा जो श्वेतांबर जैन है व अ मूर्तिपूजक संप्रदाय है। यह संप्रदाय आज से करीब 260 साल पहले श्वेतांबर जैन के स्थानकवासी संप्रदाय से अलग होकर तेरापंथ के नाम से विख्यात हुआ। इसके आदि प्रवर्तक आचार्य भिक्षु हैं । मैं गर्व करता हूं कि मैं जैन हूं और मुझे गौरव है कि मैं तेरापं थी हूं। आज के परिपेक्ष में सभी लोग अनुया यी तो हैं पर क्या अनुया यी बन ना एक भेड़ चाल नहीं है ? क्या हम जिस पर गर्व करते हैं या गौरव करते हैं , उसके सिद्धांतों को व दर्शन को नहीं जानते हैं ; तो क्या गौरव करना उचित है ?...
आचार्य भिक्षु के startup tools स्थान: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी विषय: स्टार्टअप मैनेजमेंट – स्थायित्व, नैतिकता और नेतृत्व कक्षा की शुरुआत होती है। प्रोफेसर जॉन रे आज कुछ अलग ही मूड में हैं। छात्र अपनी नोटबुक खोलते हैं, सोचते हैं आज किसी यूनिकॉर्न स्टार्टअप की चर्चा होगी। लेकिन जैसे ही प्रोजेक्टर चालू होता है, स्क्रीन पर एक नाम चमकता है: “ Acharya Bhikshu – एक संत, एक सिस्टम, एक स्टार्टअप ” कक्षा में हलचल होती है। एक छात्र बुदबुदाता है — "सर, ये कोई साधु हैं क्या? उनका स्टार्टअप से क्या लेना-देना?" प्रोफेसर मुस्कुराते हुए कहते हैं: जब आज की युवा पीढ़ी किसी स्टार्टअप की बात करती है, तो वह इनोवेशन, वैल्यू क्रिएशन, और लीडरशिप को केंद्र में रखती है। पर सोचिए — अगर हम आपको बताएं कि 18वीं सदी में एक ऐसे संत थे जिन्होंने धर्म के क्षेत्र में ऐसा स्टार्टअप खड़ा किया, जिसकी वैल्यू आज भी लाखों लोगों के जीवन को दिशा देती है? वह स्टार्टअप था — तेरापंथ, और उसके फाउंडर थे — आचार्य भिक्षु। “कहा जाता है अच्छे से अच्छा बिजनेस भी तीन पीढ़ियां या 100 वर्षों से अधिक नहीं चल पाता है, आज मैं आपको एक ...
Great work
ReplyDeleteHarshi: Can a story be short, concise, thought provoking and entertaining?? Bhavya: Yes, it can all this and much more. Harshi: How?? Bhavi: Read Gyanam's Gyan - blog by Shreyansh Kothari
ReplyDeleteBeautiful, 👍🏼
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