☝🏼 एक छोटी सी कहानी दुर्गेश सूरज नीला बना रहा था। पवन (पिता): “गलत है।” टीचर बोली, “रंग मत सुधारिए… सपने टूट जाते हैं।” 👉🏼 रचनात्मकता नियमों से नहीं, आज़ादी से खिलती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी बेटे ने माँ के लिए लंबा पोस्ट लिखा अंत में लिखा— “मेरी सुपरमॉम…” माँ बोली, “बेटा, पोस्ट नहीं… थोड़ा साथ बैठ, एक कप चाय ही पी लेता ।” 👉🏼 सोशल मीडिया का प्यार नहीं, पास बैठा समय असली होता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी हितेश : जरूरत थी तो फोन क्यों नहीं किया? विनय : सोचा, परेशान करूँगा। हितेश , “ दोस्ती परेशान करने के लिए ही होती है।” 👉🏼 सच्चे रिश्तों में औपचारिकता नहीं होती। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी हिमांशु जिम में था। दो रेप्स के बाद बोला, “भाई, फोटो ले या रील बना… पंप दिखना चाहिए।” ट्रेनर मुस्कुराया, “ बॉडी कम, स्टोरी ज्यादा बन रही है।” 👉🏼 दिखाना आसान है, बनाना मुश्किल। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी सुमित : जल्दी-जल्दी दौड़ूँगा, जल्दी जीतूँगा। विपुल : मैं रोज थोड़ा-थोड़ा चलूँगा। सुमित थककर रुक गया… विपुल धीरे-धीरे मंज़िल तक पहुँच गया। 👉🏼 धीमी निरंतरता, तेज़ शुरुआत से ज्यादा ताकतवर होती है। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी मनोहर (लड़की का पिता): 150 डिश रखेंगे, शादी यादगार बनानी है। विमला (लड़की की दादी): बेटा, शादी अपने यहां है… कमाई होटल और इवेंट वाले ले जाएंगे। मेहमान खुश, इवेंट वाले ज्यादा खुश… घर वालों पर सालों EMI रह गई। 👉🏼 दिखावे में पैसा जलता है, समझदारी में घर चलता है। श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी रतन : यार, पूरा दिन भागा… फिर भी कुछ हुआ नहीं। सोहन : मैं तो सुबह 5 काम लिखता हूँ… शाम तक टिक लगा देता हूँ। एक भागता रहा, एक बढ़ता रहा। 👉🏼 जो लिखता है वो पूरा करता है, बाकी सिर्फ सोचते रह जाते हैं। श्रैयाँस कोठारी