एक छोटी सी कहानी 242
☝🏼 एक छोटी सी कहानी रतन : यार, पूरा दिन भागा… फिर भी कुछ हुआ नहीं। सोहन : मैं तो सुबह 5 काम लिखता हूँ… शाम तक टिक लगा देता हूँ। एक भागता रहा, एक बढ़ता रहा। 👉🏼 जो लिखता है वो पूरा करता है, बाकी सिर्फ सोचते रह जाते हैं। श्रैयाँस कोठारी