☝🏼 एक छोटी सी कहानी संगीता : “बच्चा आजकल क्या सीख रहा है?” संतोषी : “जो हम रोज़ जी रहे हैं।” 👉🏼 संस्कार बोले नहीं जाते, देखे और स्वतः सीखे जाते हैं। 🤓 श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी हरीश : “आज मन नहीं है।” ललित (पापा): “मन रोज़ बदलेगा, फिर भी काम रोज़ करना होगा।” 👉🏼 Consistency, Motivation से बड़ी ताक़त है। 🌹श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी अभिषेक : “गलत बना तो?” विवेक : “तो एक तरीका सीखेगा, जिससे यह नहीं बनता...।” 👉🏼 डर से लिया न गया निर्णय भी एक गलत निर्णय है। 🌹श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी विजय : “तू समझती ही नहीं।” प्रीति : “क्योंकि आप बोलते हैं, सुनते नहीं।” 👉🏼 रिश्ते बोलने से नहीं, सुनने से बचते हैं। 🌹श्रैयाँस कोठारी
☝🏼 एक छोटी सी कहानी “इतना बड़ा सपना?” जयेश (हँसकर) अनंत (शांति से): “हाँ… क्योंकि छोटी सोच ने मुझे आज तक कुछ नया नहीं दिया।” 👉🏼 सोच की सीमा ही जीवन की सीमा बन जाती है। श्रैयाँस कोठारी