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एक छोटी सी कहानी 250

☝🏼 एक छोटी सी कहानी वह मंदिर में ₹1000 चढ़ाकर बोला, “ आज बड़ा पुण्य मिला ।” बाहर खड़े बूढ़े ने हाथ बढ़ाया।  उसने नजरें फेर लीं — “ अभी छुट्टा नहीं है…” भगवान अंदर नहीं…  बाहर इंतज़ार कर रहे थे। 👉🏼 भगवान मूर्ति में कम… इंसान में ज़्यादा मिलते हैं। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 249

☝🏼 एक छोटी सी कहानी मीटिंग 4 घंटे चली। अंत में  बॉस: “फैसला अगली मीटिंग में।” लोग उठ गए… मुद्दा वहीं बैठा रहा। 👉🏼 निर्णय के बिना चर्चा, सिर्फ समय की खपत है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 248

☝🏼 एक छोटी सी कहानी दुर्गेश सूरज नीला बना रहा था। पवन (पिता): “गलत है।” टीचर बोली, “रंग मत सुधारिए… सपने टूट जाते हैं।” 👉🏼 रचनात्मकता नियमों से नहीं, आज़ादी से खिलती है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 247

☝🏼 एक छोटी सी कहानी बेटे ने माँ के लिए लंबा पोस्ट लिखा अंत में लिखा— “मेरी सुपरमॉम…” माँ बोली, “बेटा, पोस्ट नहीं… थोड़ा साथ बैठ, एक कप चाय ही पी लेता ।” 👉🏼 सोशल मीडिया का प्यार नहीं, पास बैठा समय असली होता है। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 246

☝🏼 एक छोटी सी कहानी हितेश : जरूरत थी तो फोन क्यों नहीं किया? विनय : सोचा, परेशान करूँगा। हितेश , “ दोस्ती परेशान करने के लिए ही होती है।” 👉🏼 सच्चे रिश्तों में औपचारिकता नहीं होती। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 245

☝🏼 एक छोटी सी कहानी  हिमांशु जिम में था। दो रेप्स के बाद बोला, “भाई, फोटो ले या रील बना… पंप दिखना चाहिए।” ट्रेनर मुस्कुराया, “ बॉडी कम, स्टोरी ज्यादा बन रही है।” 👉🏼 दिखाना आसान है, बनाना मुश्किल। 🙏🏼श्रैयाँस कोठारी

एक छोटी सी कहानी 244

☝🏼 एक छोटी सी कहानी सुमित : जल्दी-जल्दी दौड़ूँगा, जल्दी जीतूँगा। विपुल : मैं रोज थोड़ा-थोड़ा चलूँगा। सुमित थककर रुक गया… विपुल धीरे-धीरे मंज़िल तक पहुँच गया। 👉🏼 धीमी निरंतरता, तेज़ शुरुआत से ज्यादा ताकतवर होती है। श्रैयाँस कोठारी